फ़रवरी 19, नयी दिल्ली,
उच्च शिक्षा व विदेश में पढ़ाई की खातिर बैंकों के चक्कर
काट रहे छात्रों और उनके अभिभावकों के लिये यह खबर राहत
भरी हो सकती है कि अब उन्हें ऋण के लिये न कोई गारंटी
देनी होगी, न ही कोई संपत्ति गिरवी रखनी पड़ेगी। मानव
संसाधन विकास मंत्रालय एक ऐसे फंड ट्रस्ट की स्थापना करने
जा रहा है जो छात्रों की ओर से बैंकों को ऋण वापसी की
गारंटी देगा। अगले वित्तीय वर्ष में स्थापित होने वाले
हायर एजुकेशन क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट को केंद्र सरकार
हर साल 1000 करोड़ रुपये इस काम के लिये उपलब्ध करायेगी।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार
वित्त मंत्रालय से ट्रस्ट की स्थापना के लिये हरी झंडी
मिल चुकी है। योजना आयोग भी इस मामले में सहमत है।
अलबत्ता यह ट्रस्ट पहले प्रस्तावित नेशनल एजुकेशन
फाइनेंशियल कारपोरेशन का ही हिस्सा था लेकिन योजना आयोग
ने कारपोरेशन के प्रस्ताव को अभी तक हरी झंडी नहीं दी
है। वित्तमंत्री भी शिक्षा क्षेत्र के लिये वित्त निगम
की स्थापना के पक्ष में नहीं हैं। लेकिन वे छात्रों को
बैंकों से शिक्षा के लिए ऋण मिलने में गारंटी आदि की
दिक्कतों को देखते हुए अलग से फंड ट्रस्ट की स्थापना के
लिये तैयार हो गये हैं। अगले महीने वर्ष 2012-13 के बजट
में इस ट्रस्ट की स्थापना पर मुहर लग जायेगी।
यह ट्रस्ट सूक्ष्म एवं लघु उद्यम के लिये स्थापित
क्रेडिट गारंटी फंड की तर्ज पर काम करेगा। वर्तमान में
बैंकों का रवैया एजुकेशन लोन को लेकर बहुत अच्छा नहीं
है। अधिकांश बैंक इस तरह के ऋण को असुरक्षित मानते हैं।
राष्ट्रीय बैंक चार लाख रुपये के ऋण पर गारंटी तथा इससे
अधिक पर गारंटी व गिरवी के लिये संपत्ति दोनों शर्तें
पूरी करने को कहते हैं। यह ट्रस्ट चार लाख रुपये तक के
ऋण लेने पर 75 प्रतिशत, चार से साढे सात लाख रुपये तक के
ऋण पर 70 प्रतिशत तथा साढ़े सात लाख से अधिक के ऋण पर 60
प्रतिशत धनराशि की गारंटी बैंकों को उपलब्ध करायेगा। यदि
किसी कारण से छात्रों द्वारा लिया गया ऋण बैंकों को वापस
नहीं मिल पाता तो ट्रस्ट इन्हीं शर्तों के अनुरूप धनराशि
चुकायेगा।




