फ़रवरी 19 ,रांची :
रांची विश्वविद्यालय के मानवशास्त्र
विभाग में आज एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग कोर्स का उद्धाटन
किया गया। कोर्स के उद्धाटन अवसर पर अलग-अलग वक्ताओं ने
कहा कि मानव व्यापार आज गंभीर चुनौती बनी हुई है। इस पर
सिर्फ कानून से अंकुश नहीं लग सकता है, बल्कि लोगों को
भी इसके खिलाफ जागरुक होना होगा।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष हेमलता एस मोहन ने कहा कि
रांची विश्वविद्यालय के इस एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा
कोर्स को यूएनओ से भी सहायता दिलाने की कोशिश की जाएगी।
यूएनओ से शुरुआती तौर पर इस बारे में बातचीत हुई है।
उन्होंने इस कोर्स के विद्यार्थियों को आह्वान किया कि
वे ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर मानव व्यापार के खिलाफ
काम करें और लोगों को जागरुक करें।
रांची विश्वविद्यालय के कुलपति डा. एलएन भगत ने एंटी
ह्यूमन ट्रेफिकिंग कोर्स के महत्व पर प्रकाश डाला। आईजी
रेजी डुंगडुंग ने कहा कि नक्सल और बेरोजगारी की वजह से
मानव व्यापार की समस्या उत्पन्न हुई है। लोहरदगा, सिमडेगा,
खूंटी व गुमला जैसे जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में यह
गंभीर है। पूर्व कुलपति प्रो. एए खान ने कहा कि रोजगार
देने के नाम पर मानव व्यापार सिर्फ ठगी है। प्रतिकुलपति
प्रो. वीपी शरण ने कहा कि मानव व्यापार का इतिहास काफी
पुराना है। यह काफी लंबे समय से चला आ रहा है।
वेस्टइंडीज सहित कई देशों में यहां के लोगों को मजदूर
बनाकर ले जाया गया था। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23
में इस बात को ध्यान में रखते हुए मानव व्यापार को
प्रतिबंधित करार दिया गया है। मानव व्यापार को अपराध
बताया गया है और इसमें शामिल लोगों के लिए सजा के
प्रावधान किये गये हैं।
इससे पहले स्वागत भाषण विभागाध्यक्ष डा. करमा उरांव ने
किया। संचालन डा. अविनाश चन्द्र मिश्र और धन्यवाद ज्ञापन
डा. एसपी सिन्हा ने किया।




